
चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक में जंगल गई दो महिलाओं पर एक भालू ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमने में जहां एक महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दूसरी महिला लक्ष्मी देवी 9 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। लेकिन समय पर उपचार ना मिलने की वजह से उनका निधन हो गया।
भालू के हमले में धायल लक्ष्मी की भी मौत
दरअसल गंभीर रूप से घायल हुई लक्ष्मी को सीएचसी पोखरी से हायर सेंटर रेफर किया गया। इसी को लेकर परिवार ने लक्ष्मी के लिए हेलिकॉप्टर एंबुलेंस की मांग की था। ताकि लक्ष्मी को वक्त पर इलाज मिल सके। प्रशासन ने इसके लिए कोशिश भी की। लेकिन खराब मौसम का हवाला देते हुए लक्ष्मी को सड़क मार्ग से ही ले जाने को कहा।
हेलिकॉप्टर उड़ता तो बच जाती जान
हालांकि श्रीनगर के पास उसकी मौत हो गई। लेकिन हेलिकॉप्टर एंबुलेंस से अगर इसे ले जाया जाता तो क्या पता महिला बच जाती। आज सवाल सिर्फ एक भालू के हमले का नहीं है। सवाल उत्तराखंड के उस पूरे सिस्टम का है जो जंगलों में इंसान को जानवरों का निवाला बनने छोड़ देता है।
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इंसान को जानवरों का निवाला बनने छोड़ दिया जाता
अस्पतालों के नाम पर सिर्फ लाचारी बांटता है। जब इन सबको लेकर हमारे वन और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से सवाल किए जाते हैं। वो कहते हैं कि जब महिलाएं खुद ही जानवरों के मुंह में जाती हैं तो हम क्या ही कर सकते हैं


