उत्तराखंड- पौड़ी व उत्तरकाशी में फटा बादल, मलबे की चपेट में आए दर्जनों घर, दो सड़कें बहीं आवागमन हुआ ठप, राहत-बचाव में जुटा प्रशासन

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पौड़ी और उत्तरकाशी में बादल फटने से दो दर्जन भवन क्षतिग्रस्त
ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर बचाई जान

पौड़ी और उत्तरकाशी में मूसलधार वर्षा से बुधवार शाम आफत आ गई। दोनों जिलों में बादल फटने से कई एकड़ कृषि भूमि बह गई। पानी और मलबे की चपेट में आने से करीब दो दर्जन भवन व गोशाला क्षतिग्रस्त हो गए। इससे दो मवेशियों की मौत हो गई।

पौड़ी में कोटद्वार-बैजरो मोटर मार्ग का करीब 30 मीटर हिस्सा बह गया और वाहन मलबे में दब गए। इस दौरान ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर जान बचाई। प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाने और संचार सेवा बहाल करने के निर्देश दिए हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर वर्षा का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा और चारों धाम में यात्रा सुचारु है।

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शाम करीब पांच बजे पौड़ी के बीरोंखाल प्रखंड स्थित बैजरो और आसपास क्षेत्र में मूसलधार वर्षा हो रही थी। इसी दौरान कुणजोली गांव के पास बादल फट गया। इससे बरसाती गदेरे उफान पर आ गए। यह देखकर ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। पानी के साथ बहकर आए मलबे की चपेट में आने से कुणजोली गांव में भगत सिंह का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। सुकई गांव में 20 घरों में पानी घुस गया।

कुणजोली के समीप ही कोटद्वार-बैजरो मार्ग का करीब 30 मीटर हिस्सा बह गया और कई जगह मलबा आने से सड़क बंद हो गई। राइंका फरसाड़ी के खेल मैदान में भी मलबा भर गया। कुणजोली, फरसाड़ी, सुकई, जिवई, गुडियालखेत, सतघरिया आदि गांवों में कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है।

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जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान ने जिला आपदा परिचालन केंद्र पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि उप जिलाधिकारी नूपुर वर्मा को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। सुकई व फरसाड़ी गांवों के प्रभावितों को प्राथमिक विद्यालय और पंचायतघर में ठहराने व उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। नुकसान के आकलन के लिए लोनिवि, जल संस्थान, ऊर्जा निगम के अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। चिकित्सकों की टीम भी भेजी गई है।

उधर, उत्तरकाशी में चिन्यालीसौड़ तहसील के सुदूरवर्ती गढ़वालगाड गांव में शाम साढ़े पांच बजे भारी वर्षा हुई। इस दौरान गांव के बौणी नामे तोक में बादल फटने से पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर गांव के मध्य पहुंच गए। इससे गांव में हड़कंप मच गया और ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।

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करीब छह बजे वर्षा बंद हुई तो एक गोशाला मलबे में दबी मिली। इसमें दबने से एक भैंस और एक बैल की मौत हो गई। पूर्व प्रधान सूरत सिंह के मकान का एक हिस्सा और चतर सिंह नेगी की परचून की दुकान भी मलबे में दब गई।

इसके अलावा कई घरों में मलबा घुस गया। गांव का मुख्य रास्ता पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। पेयजल योजना और खेतों को भी नुकसान पहुंचा है। तहसील से एक टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है।

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