उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी किसानों की आय, जिम्मेदारी और वैज्ञानिक सोच से मिलेगी सफलता: डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव!

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फूलपुर (प्रयागराज)। कृषि और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख आधार हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और समर्पित कार्यशैली अपनाकर किसान पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं। यह बात उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने मोतीलाल नेहरू फार्मर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, इफको परिसर, फूलपुर में आयोजित चार दिवसीय अंतरराज्यीय विशेष कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन किसानों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सफलता केवल विचारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और निरंतर कर्म से प्राप्त होती है। पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल उसी समर्पण के साथ करनी चाहिए, जिस प्रकार एक जिम्मेदार व्यक्ति अपने परिवार की देखभाल करता है। उन्होंने उन्नत नस्लों के चयन, संतुलित आहार, स्वच्छ पशुशाला, नियमित टीकाकरण तथा रोग नियंत्रण को पशुपालन की सफलता का आधार बताया।
डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव का संबंध देश के प्रतिष्ठित कृषि एवं पशु चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में से एक, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से रहा है। उन्होंने वहीं से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में पशुपालन एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में वे प्रयागराज जनपद में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और किसानों को वैज्ञानिक पशुपालन के प्रति जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न राज्यों से आए किसानों ने पशुओं में होने वाले रोग, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक, टीकाकरण, कृमिनाशन, नस्ल सुधार तथा पशु स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। डॉ. श्रीवास्तव ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए पशुओं में आमतौर पर उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण दवाओं एवं उपचार पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), गलघोटू (एचएस) और लंगड़ी बुखार (बीक्यू) जैसे रोगों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है।
साथ ही कृमिनाशक दवाओं का नियमित उपयोग, मिनरल मिक्सचर, कैल्शियम सप्लीमेंट, लिवर टॉनिक तथा पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार आवश्यक औषधियों का प्रयोग पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाता है। उन्होंने किसानों को चेताया कि बिना पशु चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि समाज में नैतिकता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का विशेष महत्व है। सच्ची देशभक्ति केवल नारों से नहीं, बल्कि अपने कार्यों को पूरी निष्ठा से करने, समाज के प्रति संवेदनशील रहने और जरूरतमंदों की सहायता करने से प्रकट होती है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों, वैज्ञानिक सोच और बेहतर प्रबंधन अपनाकर पशुपालन को आय का सशक्त साधन बनाने का संदेश दिया। किसानों ने भी प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि यहां प्राप्त जानकारी उनके पशुपालन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने में मददगार साबित होगी

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