
हल्दूचौड़। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ लालकुआं में कांग्रेस की टिकट को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। दावेदारों के बीच अपनी राजनीतिक ताकत और संगठन में पकड़ साबित करने की होड़ के बीच कांग्रेस प्रदेश सचिव शंकर जोशी ने टिकट को लेकर बड़ा दावा कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह लालकुआं से कांग्रेस का 100 प्रतिशत टिकट लेकर आएंगे और जीत पार्टी की झोली में डालेंगे।
बुधवार को मोटाहल्दू स्थित एक निजी प्रतिष्ठान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शंकर जोशी ने अपनी दावेदारी के समर्थन में करीब तीन दशक के राजनीतिक अनुभव और चुनावी सक्रियता का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 और 2007 में हरीश चंद्र दुर्गापाल, 2012 में हरेंद्र बोरा, 2017 में फिर हरीश चंद्र दुर्गापाल तथा 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव में उन्होंने पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया। अब तक दूसरों को चुनाव लड़ाने में भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन इस बार स्वयं विधानसभा पहुंचना चाहते हैं।
पत्रकार वार्ता में शंकर जोशी का एक और बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा, ‘द्वारिकाधीश मेरे पास हैं, सुदामा मैं हूं।’ नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के करीबी माने जाने वाले जोशी के इस बयान को उनके राजनीतिक संबंधों और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस टिप्पणी का स्पष्ट संदर्भ नहीं बताया, लेकिन उनके इस अंदाज ने टिकट की दावेदारी में राजनीतिक रिश्तों की भूमिका को लेकर चर्चाएं जरूर तेज कर दी हैं।
महिला नेतृत्व अथवा महिला प्रत्याशी को प्राथमिकता दिए जाने के सवाल पर शंकर जोशी ने अपनी पत्नी का नाम सामने रखकर एक नया राजनीतिक विकल्प भी प्रस्तुत किया। उन्होंने उन्हें सक्षम महिला दावेदार बताया। इससे स्पष्ट हुआ कि अपनी व्यक्तिगत दावेदारी के साथ वह महिला नेतृत्व के विकल्प को भी सामने रखने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
शंकर जोशी ने लालकुआं विधानसभा के विकास को लेकर भी अपना नजरिया सामने रखा। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति को केवल बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के मुद्दे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। बरेली रोड, गौलापार और चोरगलिया क्षेत्र की समस्याएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की पैरवी करते हुए कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में नगर पालिका गठन की पहल का उल्लेख किया और भाजपा सरकार पर उस निर्णय को वापस लेने का आरोप लगाया।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा विधानसभा क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। हालांकि इन घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कार्ययोजना और समयसीमा सामने आना अभी बाकी है।
लालकुआं क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों का काम केवल अपनी सरकार के कार्यों का श्रेय लेना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को उठाना भी है। विकास और जनसुरक्षा के मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।
कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर शंकर जोशी ने पार्टी में किसी तरह की फूट से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व का निर्देश स्पष्ट है कि टिकट जिसे भी मिलेगा, सभी कार्यकर्ता और नेता मिलकर उसे चुनाव लड़ाएंगे। यदि पार्टी उनसे अधिक योग्य किसी दूसरे नेता को प्रत्याशी बनाती है तो संगठन का निर्णय उन्हें स्वीकार होगा।
दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की ओर से पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दिए जाने को उन्होंने सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया। साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक प्राथमिकता लालकुआं विधानसभा ही है। वह अपनी दावेदारी से वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा चुके हैं और अब पार्टी की रायशुमारी तथा आगे की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। चुनावी अनुभव, संगठनात्मक पकड़, स्थानीय जनाधार और वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है।


