
धीरज भट्ट
लालकुआं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ लालकुआं विधानसभा सीट का पिछला चुनावी इतिहास भी चर्चा में आने लगा है। इस सीट के उपलब्ध चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो एक दिलचस्प पैटर्न सामने आता है। जिन प्रत्याशियों ने एक चुनाव में जीत दर्ज की, वे अगले चुनाव में अपनी जीत दोहराने में सफल नहीं रहे। हालांकि उपलब्ध चुनावों के आधार पर इसे स्थायी चुनावी मिथक कहना उचित नहीं होगा, लेकिन 2027 के चुनाव में यह सवाल जरूर उठ सकता है कि क्या लालकुआं में इतिहास एक बार फिर दोहराएगा?
लालकुआं विधानसभा सीट के 2012 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी हरीश चंद्र दुर्गापाल ने जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 25,189 वोट मिले, जो कुल मतों का 37.37 प्रतिशत था। दूसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के नवीन चंद्र दुम्का रहे। उन्हें 16,341 वोट यानी 24.24 प्रतिशत मत मिले। कांग्रेस के हरेंद्र सिंह को 13,863 वोट यानी 20.57 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के देवकी नंदन सुयाल को 3,719 वोट यानी 5.52 प्रतिशत मत मिले। उत्तराखंड डेमोक्रेटिक पार्टी के बसंत जोशी को 1,849 वोट यानी 2.74 प्रतिशत वोट मिले। भुवन चंद्र पोखरिया को 1,803 वोट यानी 2.67 प्रतिशत, कमल जोशी को 1,218 वोट यानी 1.81 प्रतिशत, मान सिंह पाल को 945 वोट यानी 1.40 प्रतिशत और प्रकाश जोशी को 654 वोट यानी 0.97 प्रतिशत मत मिले। संजय सिंह को 627 वोट यानी 0.93 प्रतिशत, वीरेंद्रपुरी’’ को 569 वोट यानी 0.84 प्रतिशत, महेश चंद्र को 251 वोट यानी 0.37 प्रतिशत, सुंदर सिंह खनका को 195 वोट यानी 0.29 प्रतिशत और मुकेश चंदोला को 180 वोट यानी 0.27 प्रतिशत वोट मिले। 2017 के विधानसभा चुनाव में लालकुआं की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भारतीय जनता पार्टी के नवीन चंद्र दुम्का ने इस बार 44,293 वोट हासिल किए और 55.65 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की। पिछली बार दूसरे स्थान पर रहे नवीन चंद्र दुम्का इस चुनाव में पहले स्थान पर पहुंच गए। वहीं पिछली बार विजेता रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और उन्हें 17,185 वोट यानी 21.59 प्रतिशत मत मिले। निर्दलीय प्रत्याशी हरेंद्र सिंह बोरा को 14,709 वोट यानी 18.48 प्रतिशत मत मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।
बहुजन समाज पार्टी के राजीव मोहन को 964 वोट यानी 1.21 प्रतिशत, भाकपा (माले) के पुरुषोत्तम शर्मा’ को 793 वोट यानी 1.00 प्रतिशत मत मिले। निर्दलीय वीरेंद्र पुरी महाराज को 592 वोट यानी 0.74 प्रतिशत, शिवसेना के चंदन सिंह राणा को 407 वोट यानी 0.51 प्रतिशत और निर्दलीय विजय जोशी को 238 वोट यानी 0.30 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। उत्तराखंड क्रांति दल की दीपा भट्ट को 224 वोट यानी 0.28 प्रतिशत और निर्दलीय राजेंद्र सिंह बिष्ट को 191 वोट यानी 0.24 प्रतिशत वोट मिले। 2022 में लालकुआं विधानसभा सीट से भाजपा के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट’’ ने जीत हासिल की थी। उन्हें 46,307 वोट यानी 53.65 प्रतिशत मत मिले। कांग्रेस के हरीश रावत को 28,780 वोट यानी 33.35 प्रतिशत मत मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। निर्दलीय संध्या डालाकोटी को 3,908 वोट यानी 4.53 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। निर्दलीय पवन कुमार चौहान को 2,339 वोट यानी 2.71 प्रतिशत, निर्दलीय कुंदन सिंह मेहता को 1,552 वोट यानी 1.80 प्रतिशत और निर्दलीय यशपाल आर्य को 901 वोट यानी 1.04 प्रतिशत मत मिले। आम आदमी पार्टी के चंद्रशेखर पांडे को 898 वोट यानी 1.04 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। निर्दलीय वीरेंद्रपुरी महाराज को 527 वोट यानी 0.61 प्रतिशत, बहुजन समाज पार्टी के पृथ्वीपाल सिंह रावत को 410 वोट यानी 0.48 प्रतिशत और भाकपा (माले) के बहादुर सिंह जंगी को 324 वोट यानी 0.38 प्रतिशत मत मिले। निर्दलीय नवीन चंद्र पंत को 162 वोट यानी 0.19 प्रतिशत, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के राम सिंह को 103 वोट यानी 0.12 प्रतिशत और समाजवादी पार्टी के मनोज पांडे को 96 वोट यानी 0.11 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
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अब 2027 पर नजर
लालकुआं विधानसभा के इन आंकड़ों से इतना स्पष्ट है कि पिछले चुनावों में उम्मीदवारों की स्थिति और दलों के समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक चुनाव में विजेता रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल अगले चुनाव में अपनी जीत कायम नहीं रख सके, जबकि पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे नवीन चंद्र दुम्का बाद में विजेता बने।
अब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे में लालकुआं की राजनीति में यह सवाल चर्चा का विषय बन सकता है कि क्या पिछले चुनावों में दिखाई दिया यह पैटर्न आगे भी जारी रहेगा।
हालांकि 2027 के परिणाम के बारे में अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। प्रत्याशियों की घोषणा, दलों का टिकट वितरण, स्थानीय मुद्दे, चुनावी गठबंधन और मतदाताओं का रुझान चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। लालकुआं विधानसभा के लिए 2027 का सबसे दिलचस्प सवाल यही रहेगा। क्या पिछले चुनावों में दिखाई दिया बदलाव का सिलसिला जारी रहेगा या इस बार कोई प्रत्याशी लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर नया चुनावी इतिहास बनाएगा ?


