उत्तराखंड में अब बच्चों को पढ़ाई जाएगी कुमाऊं और गढ़वाल के राजाओं की वीर गाथा

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उत्तराखंड में अब बच्चों को मुगलों और अंग्रेजों की कहानियों से इतर अब हिंदू राजाओं की शौर्य गाथा के साथ कुमाऊं और गढ़वाल के राजाओं की वीर गाथाएं भी पड़ाई जाएगी। हमने आज तक अपने इतिहास कि किताबों में उन विदेशी आंक्रांताओं के बारे में तो खूब पड़ा है जिनकी क्रूरता ने हमारे देश में दहशत फैलाई थी। लेकिन अब पहली बार बच्चों के स्कूलों में देश के नायकों और उत्तराखंड के शूरवीरों की गाथा भी पढ़ाई जाने वाली है।

उत्तराखंड में अब बच्चों को पढ़ाई जाएगा कुमाऊं और गढ़वाल के राजाओं की वीर गाथा

बता दें की अब उत्तराखंड के स्कूलों में शनिवार को 6 से 12वीं तक के बच्चों को शनिवार की आखिरी क्लास में उन शूरवीरों की गाथा पढ़ाई जाएगी जिसके बारे में बहुत कम उत्तराखंड बच्चे जानते होंगे। जिनके बारे में बस तभी पढ़ा जाता है जब किसी बच्चे को सरकारी ऐक्जाम देना होता है।

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उसके अलावा बच्चे जानते ही नहीं है की हमारे कुमाऊं और गढ़वाल की धरती पर ऐसे-ऐसे प्रतापी राजाओं ने जन्म लिया, जिन्होंने 52 गढ़ों को एक सूत्र में पिरोकर एक अजेय साम्राज्य खड़ा किया था। जिनकी हुंकार कभी कुमाऊं की वादियों में गूंजा करती थी और बड़े बड़े दुशमन उससे कांपते थे। अब हमारे राज्य के बच्चे सिर्फ मुगलों को ही नहीं बल्कि गढ़वाल राजवंश के संस्थापक कनकपाल।

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इन राजाओं के बारे में जानेंगे छात्र

गढ़वाल के 52 गढ़ों को एकीकृत करने वाले राजा अजयपाल, अपनी छोटी टुकड़ी के साथ गोरखों का डट कर सामना करने वाले राजा प्रद्युम्न शाह के साथ ही कुमाऊं में चंद वंश के संस्थापक राजा सोमचंद मुगल आक्रमण को विफल करने और तिब्बत के साथ ही डोटी पर अपना आधिपत्य जमाने वाले राजा बाज बहादुर चंद और राजा गरूड़ ज्ञानचंद की वीर गाथाएं पढ़ेंगे हमारे शूरवीरों के बारे में जानेंगे।

प्रतापी हिंदू सम्राटों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा

इसके अलावा भारत के उन प्रतापी हिंदू सम्राटों के बारे में भी उत्तराखंड के बच्चों को पढ़ाया जाएगा जिन्होंने राष्ट्रप्रेम और लोक कल्याण के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। बच्चों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए वक्त वक्त पर क्विज और प्रतियोगिताएं होंगे साथ ही इन्हें जीतने वाले बच्चों को इनाम भी दिया जाएगा।

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ताकि हर एक बच्चे को पता हो की वो सिर्फ तीर्थयाज्ञियों के स्वागत करने वाले प्रदेश से नहीं आते बल्कि उन पुरखों की जमीन से आते हैं जिन्होंने वक्त वक्त पर दुशमनों के दांत खट्टे किए हैं। उत्तराखंड में अब बच्चों को उनके असली गौरव से परिचित कराया जा रहा है। फिर चाहे वो गीता का पाठ हो रामायण और महाभारत की कक्षाएं हो। धार्मिक स्थलों की यात्राएं हो और अब वीर हिंदू सम्राटों की गौरवगाथाएं,।

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