तस्वीरों ने बढ़ाई मुश्किलें: पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि में अवैध कब्जे के आरोप

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देश के प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् और पद्म भूषण (2020) व पद्मश्री (2006) से सम्मानित डॉ. अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि में अवैध अतिक्रमण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह आरोप देहरादून वन प्रभाग की आर्केडिया बीट, अशारोड़ी रेंज स्थित आरक्षित वन क्षेत्र को लेकर लगाए गए हैं, जहां HESCO (Himalayan Environmental Studies & Conservation Organization) द्वारा सालों से संस्था संचालन, भवनों और सड़कों के निर्माण का दावा किया जा रहा है।

पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी पर आरक्षित वन भूमि में अवैध कब्जे के आरोप

आरोपों के अनुसार, सरकार द्वारा आरक्षित वन भूमि का एक हिस्सा कृषि प्रयोजन के लिए लीज पर दिया गया था, लेकिन समय के साथ ली गई भूमि से अधिक क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया गया। बताया जा रहा है कि इस अतिरिक्त भूमि पर न केवल संस्थागत गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, बल्कि स्थायी भवन और सड़क निर्माण भी कराया गया है। इस पूरे प्रकरण में ISRO-BHUVAN सैटेलाइट मानचित्र और Google Earth के वर्ष 2011, 2013, 2024 और 2025 के तुलनात्मक चित्रों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई मुश्किलें

सैटेलाइट तस्वीरों में आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर HESCO परिसर का लगातार विस्तार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे वन भूमि के उपयोग में बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया है। यह मामला Forest Conservation Act, 1980 की धारा-2 के उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है। इस धारा के तहत किसी भी आरक्षित वन भूमि का गैर-वन प्रयोजन के लिए उपयोग करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है। आरोप है कि इस तरह की कोई स्वीकृति लिए बिना निर्माण गतिविधियां संचालित की गई।

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अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली ने की जांच की मांग

देहरादून कोर्ट परिसर स्थित नेरिस्ट कोऑपरेटिव बैंक के पास चेंबर नंबर-2 में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली ने मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग की है। उन्होंने संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि सैटेलाइट साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। बता दें यह आरोप ऐसे व्यक्ति और संस्था पर लगे हैं, जो सालों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए पहचाने जाते रहे हैं।

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