
लालकुआ बिंदुखत्ता आंदोलन तेज, 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में महारैली की तैयारी; यूकेडी ने दिया समर्थन
मुख्यमंत्री से नहीं मिला ठोस आश्वासन, राजस्व ग्राम की अधिसूचना के लिए अब जिलाधिकारी के घेराव की रणनीति
लालकुआं। बिंदुखत्ता को वनाधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी ठोस आश्वासन नहीं मिलने से नाराज वन अधिकार संगठन ने अब हल्द्वानी में महारैली निकालकर जिलाधिकारी के घेराव की तैयारी शुरू कर दी है। रविवार को लालकुआं तहसील परिसर में जारी अनिश्चितकालीन धरने के सातवें दिन बिंदुखत्ता के सभी 32 ग्रामों के संयोजक और सहसंयोजक धरने पर बैठे। इस दौरान 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में महारैली आयोजित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
धरना स्थल पर गीत-संगीत और वक्ताओं के संबोधन के माध्यम से राजस्व ग्राम की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि आगामी महारैली को व्यापक रूप देने के लिए धरने के साथ-साथ बिंदुखत्ता के प्रत्येक घर तक संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस बार बिंदुखत्ता के अलावा वन भूमि पर बसे अन्य गांवों को भी आंदोलन से जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि वन भूमि पर निवास करने वाले लोगों के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके।
मुख्यमंत्री के जवाब से संगठन नाराज
इससे पहले देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट और कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा ने धरना स्थल पर आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम संबंधी दावे को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिलने के बावजूद अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि के अनारक्षण से जुड़ी पत्रावली केंद्र सरकार के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट भेजने की बात दोहराई।
इस पर वन अधिकार संगठन ने नाराजगी जताते हुए सरकार से सवाल किया कि यदि वन भूमि के अनारक्षण की प्रक्रिया अपनाई जानी है, तो इसके लिए आवश्यक दोगुनी भूमि कहां से उपलब्ध कराई जाएगी? संगठन ने आशंका जताई कि यदि पत्रावली सुप्रीम कोर्ट में लंबित होती है, तो बिंदुखत्ता की स्थिति भी बापू ग्राम जैसी हो सकती है। संगठन का कहना है कि वन विभाग आज भी बिंदुखत्ता की सैकड़ों वर्ष पुरानी बसासत को अतिक्रमण की सूची में दर्शाता है।
यूकेडी ने आंदोलन को दिया समर्थन
धरना स्थल पर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और जनमैत्री संगठन के बच्ची सिंह बिष्ट सहित सैकड़ों यूकेडी कार्यकर्ता पहुंचे। उन्होंने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग का समर्थन करते हुए आंदोलन को मजबूती देने की बात कही।
धरने में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, नारायण सिंह कोरंगा, सूबेदार खड़क सिंह पपोला, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, श्याम सिंह रावत, बसंत पांडेय, लक्की जोशी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, रमेश गोस्वामी, भरत नेगी, दीपक जोशी, महेश फुलारा, भूपेश जोशी, नवीन जोशी, दीपक पाठक, जीवन पांडे, ममता बिष्ट, गोविंद गिरी, दौलत सिंह कोरंगा, पूरन लोहनी, बिशन सिंह पपोला, मोहन राम, धन गिरी गोस्वामी, पार्वती भट्ट और गंगा देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब दिसंबर के बाद प्रस्तावित हल्द्वानी महारैली को आंदोलन की अगली बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


