
उत्तराखंड कैडर के IFS officer Sanjiv Chaturvedi से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों के सुनवाई से स्वयं को अलग करने का सिलसिला जारी है। अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की दिल्ली पीठ के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह वर्मा ने भी संजीव चतुर्वेदी की ओर से दायर याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इसके साथ ही उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 17 न्यायाधीश उनके मामलों की सुनवाई से अलग हो चुके हैं।
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उत्तराखंड सरकार के आदेश को दी गई है चुनौती
CAT की दिल्ली पीठ ने 21 सितंबर को इस संबंध में आदेश पारित किया। संजीव चतुर्वेदी की ओर से दायर याचिका में उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जो आईएफएस अधिकारियों की मूल्यांकन रिपोर्ट की प्रक्रिया से संबंधित है। याचिका में उत्तराखंड संवर्ग के भारतीय वन सेवा अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट यानी ACR से जुड़ी प्रक्रिया का मुद्दा उठाया गया है। इसमें मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णय के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है।
पहले भी कई न्यायाधीश सुनवाई से हट चुके हैं
संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में इससे पहले भी कई न्यायाधीश सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मार्च 2018 में CAT दिल्ली के तत्कालीन अध्यक्ष न्यायमूर्ति आरएन सिंह ने उनके मामले से खुद को अलग किया था। इसके बाद नवंबर 2023 में CAT के मनीष गर्ग और छबिलेंद्र राउल और जनवरी 2025 में CAT के न्यायमूर्ति राजीव जोशी भी संबंधित मामलों की सुनवाई से अलग हो चुके हैं।
SC से जिला न्यायपालिका तक 17 न्यायाधीशों का दावा
आंकड़ों के अनुसार, अब तक सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीश, नैनीताल हाईकोर्ट के चार न्यायाधीश, CAT के अध्यक्ष सहित नौ न्यायाधीश और जिला न्यायपालिका के दो न्यायाधीश संजीव चतुर्वेदी से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। इसे न्यायिक इतिहास में एक रिकॉर्ड के तौर पर बताया जा रहा है।


