बड़ी खबर- तीसरी संतान छिपाकर बने जिला पंचायत सदस्य, नेताजी की अब गई कुर्सी ।।।

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बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से पंचायतीराज व्यवस्था से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र संख्या-4 असौं से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुंदन राम को तीसरी संतान संबंधी जानकारी छिपाने के गंभीर मामले में दोषी पाया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आरसी तिवारी द्वारा जारी एक कड़े आदेश के तहत कुंदन राम को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए तत्काल प्रभाव से अनर्ह (अयोग्य) घोषित कर दिया गया है।

विस्तृत विभागीय जांच और सरकारी अभिलेखों के गहन परीक्षण के बाद सीडीओ ने उनकी सदस्यता समाप्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है।

यह पूरा मामला तब गरमाया जब स्थानीय निवासी भगवत सिंह डसीला ने इस संबंध में पहली शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद महेंद्र प्रसाद और प्रमोद कुमार ने भी आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराईं, जिसमें आरोप लगाया गया कि त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 के दौरान कुंदन राम की तीसरी संतान का जन्म हुआ था, लेकिन उन्होंने चुनाव के समय इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाया।

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इस गंभीर शिकायत पर पंचायतीराज निदेशालय से मार्गदर्शन मांगा गया था। इसके बाद निदेशक ने साफ किया कि उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा-90(1)(द) के तहत दो से अधिक जीवित जैविक संतान होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द करने की अनर्हता लागू होती है।

मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए प्रशासन द्वारा एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी विभागों से पुख्ता अभिलेख जुटाकर विस्तृत पड़ताल की।

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सरकारी दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि कुंदन राम की पहली पुत्री अक्षिता का जन्म 25 नवंबर 2021 को, दूसरी पुत्री अर्पिता का जन्म 26 फरवरी 2023 को और उनके इकलौते पुत्र अर्पित का जन्म चुनाव के वर्ष यानी 15 जुलाई 2025 को हुआ था।

जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा कि सभी प्रामाणिक दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि कुंदन राम की तीन जीवित जैविक संतानें हैं।

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मुख्य विकास अधिकारी आरसी तिवारी ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के नियमों के अनुसार दो से अधिक जीवित जैविक संतान वाले व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य बनने या बने रहने के लिए पूरी तरह अयोग्य हैं। कुंदन राम को अयोग्य घोषित करते हुए इस लंबे समय से चल रहे प्रकरण का पूरी तरह निस्तारण कर दिया गया है।

हालांकि, प्रशासन ने उन्हें कानूनी राहत का एक मौका दिया है। यदि पूर्व सदस्य इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे इस आदेश की प्राप्ति की तिथि से एक महीने के भीतर मंडलायुक्त (कुमाऊं कमिश्नर) के समक्ष अपनी अपील दायर कर सकते हैं

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