सुरक्षित यात्रा के लिए सख्ती—ऋषिकेश, हरिद्वार और नारसन में बनाए गए विशेष जांच केंद्र

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के आगाज के साथ ही परिवहन विभाग ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए विभाग ने 30 मार्च से कमर्शियल वाहनों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बस, टैक्सी और मैक्सी जैसे व्यावसायिक वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य किया गया है। यह कार्ड इस बात का प्रमाण होता है कि वाहन और चालक दोनों ही पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षित संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी वाहन को ऋषिकेश से आगे चारधाम यात्रा मार्ग पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों की सुविधा के लिए तीन प्रमुख स्थानों पर पंजीकरण और जांच केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें ऋषिकेश को मुख्य केंद्र बनाया गया है, जबकि हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित एआरटीओ कार्यालय और नारसन बॉर्डर पर भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों की जांच आसानी से हो सके।
ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले विभाग द्वारा वाहनों और चालकों के दस्तावेजों की सघन जांच की जाएगी। इसके तहत वाहन का वैध फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) अनिवार्य होंगे। साथ ही चालक के पास हिल ड्राइविंग लाइसेंस और पर्वतीय मार्गों का अनुभव होना भी जरूरी है। वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। वाहन स्वामी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और दस्तावेज अपलोड करने के बाद निर्धारित केंद्रों पर जाकर भौतिक सत्यापन कराकर ग्रीन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
परिवहन विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है, ताकि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।


