
नैनीताल। भारत में तिब्बती समुदाय को मिल रहे समर्थन के प्रति आभार जताने तथा तिब्बत में चीनी शासकों के मानवाधिकार हनन की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान आकृष्ट करने के लिए हिमाचल प्रदेश सोनल निवासी क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लोद्रो पाल्डेन व देहरादून निवासी क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस के सदस्य जामयांग तेंजिन 90 दिनों से मोटरसाइकिल रैली पर भारत भ्रमण पर निकले हैं।दोनों यात्रियों ने आरोप लगाया कि चीनी सरकार तिब्बत के सांस्कृतिक मूल्यों, संस्कृति को मिटाने के लिए बच्चों को मां-बाप व मठों से छीनकर पढ़ने को चीन भेज रही है, ताकि तिब्बती बच्चे चीनी सीख लें और तिब्बत की संस्कृति का नामोनिशान मिट जाए, तिब्बती नई पीढ़ी चीन में विलय का विरोध ना करे। अब तक चीनी सरकार पांच लाख से अधिक बच्चों को तिब्बत से जबरन उठाकर चीन ले जा चुकी है। यह रैली पिछले साल दस दिसंबर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस से शुरू हुई थी। दोनों यात्रियों का नैनीताल तिब्बती व भोटिया समुदाय की ओर से जोरदार स्वागत किया गया।दोपहर में तिब्बती बाजार के समीप इन दोनों तिब्बती समुदाय के नेताओं का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इस दौरान लोद्रो व जामयांग ने तिब्बती समुदाय को मिल रहे समर्थन व प्रेम के लिए भारत सरकार व यहां की जनता के प्रति आभार प्रकट किया। मोटर साइकिल रैली का समापन दस मार्च को 67 वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर नई दिल्ली में होगा।इस मौके पर तिब्बती समुदाय की वरिष्ठ सदस्य पेमा छाेपैल, तिब्बती मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष येसी थुप्तैन, तिब्बती संघर्ष समिति के अध्यक्ष तेंजिन जिनपा,सचिव तेंजिन धोनयोए, तेजिंन छिरींग, स्थानीय तिब्बती युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष टाशी तोपग्याल, कुंगा छौडोन, स्थानीय तिब्बती महिला संगठन के उपाध्यक्ष सोनम छोएडोन, सचिव रिंजिन छोएजोम, तेंजिन ल्हाडोन , छिरींग तोपग्याल, तेनजिन लोडॉ, तेनजिन यिगा, छिरींग पेलकी, तेंजिन नॉर्जोम, केलसंग यांगडोन, छिरींग पाल्मो, टाशी डोल्मा, छिरींग यांगज़ोम, सोनम नॉरर्जोम आदि मौजूद रहे।
संस्कृति का नामोनिशान मिटाने को चीन उठा रहा है तिब्बती बच्चों को
नैनीताल: मोटर साइकिल रैली में शामिल क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस के सदस्य जामयांग तेंजिन के अनुसार रैली 21 राज्यों व तीन केंद्र शाषित प्रदेशों से गुजरेगी। तिब्बत के शरणार्थियों को भारत में 66 वर्ष हो चुके हैं, ऐसे में भारत के लाेगों को तिब्बत के बारे में जानकारी देने व भारत सरकार सहित संयुक्त राष्ट्र संघ को तिब्बत की आजादी के लिए सार्थक प्रयास करने के प्रति जागरूक करना रैली का मुख्य मकसद है।
उन्होंने तिब्बती सर्वोच्च नेता दलाई लामा के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि भारत गुरु व तिब्बत शिष्य है,, गुरु-शिष्य के बीच हमेशा प्रेम व सद्भाव बना रहे। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार तिब्बत के सांस्कृतिक मूल्यों, संस्कृति को मिटाने के लिए बच्चों को मां-बाप व मठों से छीनकर पढ़ने को चीन भेज रही है, ताकि तिब्बती बच्चे चीनी सीख लें और तिब्बत की संस्कृति का नामोनिशान मिट जाए, तिब्बती नई पीढ़ी चीन में विलय का विरोध ना करे।
अब तक चीनी सरकार पांच लाख से अधिक बच्चों को तिब्बत से जबरन उठाकर चीन ले जा चुकी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से तिब्बत की आजादी व तिब्बत में मानवाधिकारों का हनन रोकने के लिए कदम उठाने की अपील भी की।


