मंत्री-विधायकों की फौज भी नहीं दिला पाई जीत! कटरा उपचुनाव में हार के बाद हाईकमान सख्त, तैयार हो रही ‘ब्लैक लिस्ट’

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कटरा नगर पंचायत उपचुनाव में भाजपा की हार से पार्टी हाईकमान चिंतित है और लखनऊ तक इसकी टीस महसूस की गई है। हार के कारणों पर मंथन शुरू हो गया है, निष्क्र …और पढ़ें

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पंचायत अध्यक्ष पद के उप चुनाव में पूजा कसाना को प्रमाण पत्र देते एसडीएम जीत सिंह फाइल फोटो

 शाहजहांपुर। कटरा नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के उपचुनाव में मिली हार की टीस लखनऊ तक महसूस की गई। चुनाव भले ही छोटा था, लेकिन जो परिणाम आया, हाईकमान उसे इतनी सहजता से स्वीकार करने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि इसे महज रणनीतिक चूक न मानते हुए असल कारणों पर मंथन शुरू हो गया है। उनको भी चिह्नित किया जा रहा है, जो साथ में रहकर भी निष्क्रिय बने रहे।

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जल्द ही रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। पुनरावृत्ति न हो इसके लिए कार्रवाई का चाबुक भी चल सकता है। कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कटरा नगर पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव काफी अहम था। भाजपा यहां बड़े अंतर से जीत हासिल कर मनोवैज्ञानिक बढ़त भी लेना चाह रही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

2017 के बाद तेजी से ग्राफ बढ़ा रही पार्टी उपचुनाव में दूसरे नंबर पर ठिठक गई। 2023 में कटरा नगर पंचायत की सीट कांग्रेस के खाते में गई, तो यहां अध्यक्ष के विरुद्ध भाजपा के ही पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता की पुत्रवधू सोनम गुप्ता ने याचिका दायर की, जिसके बाद पद रिक्त हो गया।

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दावा मजबूत था तो पार्टी ने सोनम को ही इस बार भी प्रत्याशी बनाया। 60 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता वाली इस सीट पर पांच मुस्लिम प्रत्याशी उतरे तो वोटों का विभाजन तय मान लिया गया। समीकरणों को देखते हुए पार्टी को बड़ी जीत की उम्मीद थी।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व विधायकों ने भी यहां बैठकें कर माहौल बनाया। जिलाध्यक्ष केसी मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी भी डेरा डाले रहे, लेकिन पार्टी सांसद के गृह क्षेत्र में दो बार से इस विधानसभा में जीत रही भाजपा नगरीय मतदाताओं का मूड़ भांपने में विफल रही। कुछ नेता बैठकों तक ही सीमित रह गए।

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मुस्लिम वोटों का बंटवारा होने के बाद भी चुनाव भाजपा के हाथ से फिसल गया। पार्टी हाईकमान ने हार का संज्ञान लिया है। परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद भी चुनाव नतीजे पक्ष में क्यों नहीं रहे, हार के कारण क्या थे, जीत न मिलने की प्रमुख वजह क्या रहीं, ऐसे कौन से नेता थे जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाई।

इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट तैयार करके प्रांतीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। इस हार का असर आने वाले चुनावों पर न पड़े इसके लिए हाईकमान सख्त कदम भी उठा सकता है।

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