Uniform civil code : पुत्र -पुत्री दोनों को मिलेगा संपत्ति में समान अधिकार, पढ़ें ड्राफ्ट में क्या हैं प्रावधान

खबर शेयर करें -



विधानसभा सत्र का आज दूसरा दिन है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन के सामने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) कानून का प्रस्ताव पेश कर दिया है। इस दौरान भाजपा के सभी विधायकों ने सदन में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरु कर दिए।


हालांकि फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद कई बदलाव किए जाएंगे। सदन में विशेषज्ञ समिति के सदस्य मनु गौड़ को भी बुलाया गया है। ताकि सदन को कानून की तकनीकियां-बारिकियां समझने में मदद मिल सके। पढ़ें क्या हैं यूसीसी में प्रावधान।

यह भी पढ़ें -  देहरादून के पलटन बाजार में भीषण अग्निकांड, तीन मंजिला गारमेंट्स शॉप में रखा सामान जलकर खाक

ये हैं Uniform civil code में प्रावधान
यूसीसी ड्राफ्ट में सभी वर्गों में पुत्र और पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
यूसीसी बिल में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन को जरुरी कर दिया गया है।
गोद लिए हुए बच्चों, सरोगेसी द्वारा जन्म लिए गए बच्चों व असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी द्वारा जन्म लिए गए बच्चों में कोई भेद नहीं किया जाएगा। उन्हें अन्य की भांति जैविक संतान ही माना जाएगा।
महिला और पुरुष के बीच विवाह तभी हो सकता है जब विवाह के समय दूल्हे या दुल्हन की पहले से कोई जिंदा पति या पत्नी न हो ।
विवाह के समय पुरुष की उम्र 21 वर्ष पूरी और स्त्री की आयु 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
विवाह का रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर सरकारी सुविधाएं नहीं देने का प्रस्‍ताव रखा गया है।
यदि पति-पत्नी में से किसी एक ने बिना किसी उचित कारण के अपने साथी को दूसरे के साथी से अलग कर दिया है, तो पीड़ित पक्ष वैवाहिक अधिकारों के प्रतिस्थापन के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है।
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में उसकी पत्नी व बच्चों को समान अधिकार दिया गया है। इसके साथ मृतक के माता-पिता को भी उसकी संपत्ति में समान अधिकार दिया गया है।
उत्‍तराखंड की 4% जनजातियों को कानून से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। यूसीसी के मसौदे में जनसंख्या नियंत्रण उपायों और अनुसूचित जनजातियों को शामिल नहीं किया गया है।
यूसीसी में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान करने का प्रस्‍ताव रखा गया है। मुस्लिम महिलाओं को भी बच्चा गोद लेने का अधिकार देने का प्रस्‍ताव बिल में है।
मुस्लिम समुदाय के भीतर हलाला और इद्दत पर रोक लगाने का प्रस्‍ताव बिल में रखा गया है।

Advertisement