उत्तराखंड- यहाँ भाई की शादी से पहले बुझ गया घर का चिराग, सड़क हादसे में मेजर शुभम सैनी की मौत

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देहरादून/चकराता– देहरादून जिले के चकराता छावनी क्षेत्र में शनिवार को एक हृदयविदारक हादसे में भारतीय सेना के मेजर शुभम सैनी (27) की मौत हो गई। उनकी कार अनियंत्रित होकर करीब 50 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। गंभीर रूप से घायल मेजर को सैन्यकर्मियों ने तत्काल रेस्क्यू कर सैनिक अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

हादसा शनिवार सुबह करीब 10 बजे छावनी क्षेत्र में बंगला नंबर-10 के पास हुआ। हादसे में मेजर शुभम के सिर में गंभीर चोट आई थी।

सेना मुख्यालय में थे तैनात
जानकारी के अनुसार, मेजर शुभम सैनी चकराता स्थित सेना के मुख्यालय में तैनात थे। शनिवार को वह अपनी कार से कहीं जा रहे थे, इसी दौरान अचानक वाहन से नियंत्रण हट गया और कार गहरी खाई में जा गिरी।

चकराता थाना प्रभारी (एसओ) शेखर नौटियाल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही आर्मी को अवगत कराया गया। मौके पर मौजूद सैन्यकर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू कर उन्हें सैनिक अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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शुक्रवार को पिता से हुई थी आखिरी बात
हादसे से एक दिन पहले ही मेजर शुभम ने अपने पिता सत्येंद्र सैनी से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था—
“पापा, बहुत जल्द छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं। तुषार भईया की शादी की तैयारी करेंगे।”

18 फरवरी को शुभम के बड़े भाई तुषार की शादी तय है। परिवार में शादी की तैयारियों को लेकर खुशी का माहौल था, लेकिन शनिवार दोपहर देहरादून से आई एक कॉल ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया।

परिवार में मचा कोहराम
मेजर शुभम की मौत की सूचना मिलते ही पिता सत्येंद्र, मां रीता देवी, भाई-बहन और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदार और ग्रामीण परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं। गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

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बचपन से था सेना में जाने का जुनून
पिता सत्येंद्र सैनी ने बताया कि शुभम को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था।

उन्होंने कहा,
“वह स्कूल के समय से ही पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार करता था। उसने सेना में जाकर देश और गांव का नाम रोशन किया। कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन देखना पड़ेगा।”

बड़े भाई तुषार ने नम आंखों से कहा कि उन्हें अभी भी शुभम की मौत पर विश्वास नहीं हो रहा। शुभम गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे।

2015 में सेना में हुए थे भर्ती
मेजर शुभम सैनी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रोहटा ब्लॉक क्षेत्र के घसौली गांव के निवासी थे।
उन्होंने आर्मी स्कूल से 12वीं पास करने के बाद NDA में चयन प्राप्त किया। पुणे में तीन साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद 2019 में NDA से पास आउट हुए। उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब के बठिंडा में हुई थी।
चकराता में उनकी यह दूसरी पोस्टिंग थी। वह कमीशन के जरिए लेफ्टिनेंट बने और प्रमोशन पाकर मेजर के पद तक पहुंचे।

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पिता भी रह चुके हैं सेना में
मेजर शुभम के पिता सत्येंद्र सैनी भी सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शुभम अभी अविवाहित थे।

परिवार में बड़े भाई तुषार नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हैं, जबकि बहन आर्मी स्कूल में शिक्षिका हैं।

गांव में होगा अंतिम संस्कार
मेजर शुभम सैनी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव घसौली में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
देश ने एक होनहार और कर्तव्यनिष्ठ सैन्य अधिकारी को खो दिया है। उनका असमय जाना परिवार, सेना और गांव के लिए अपूरणीय क्षति है

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