
21 जून रविवार को दोबारा से नीट यूजी परीक्षा(NEET Re-Exam 2026) पूरे देशभर में करवाई गई। इसी बीच बिहार से परीक्षा में नकल की खबर सामने आ रही है। पुलिस की जांच में यूजी परीक्षा में सॉल्वर गैंग के पर्दाफाश किया गया। जिसको लेकर एक दिन बाद नई कड़ियां जुड़ रही हैं। पूछताछ में ये भी पता चला कि गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए बड़ी चालाकी दिखाई। गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगा दी थी।
NEET Re-Exam 2026 में बैठाए नकली परीक्षार्थी
दरअसल इसमें बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की भी मिलीभगत सामने आई। इसी से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा केंद्र के अंदर एंट्री दिलाई गई।
मेडिकल कॉलेज का छात्र मुख्य संचालक
पुलिस सूत्रों की माने तो अब तक हुई जांच में ये तो साफ हो गया है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मेन संचालक था। उसी ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को साल्वर के रूप में तैयार कर पेपर में बैठाने का प्लान बनाया। गिरोह ने ऐसे अभ्याथियों को निशाना बनाया जो किसी भी कीमत पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए सफल होना चाहते थे।
छात्र निकला बायोमेट्रिक स्टाफ
जांच में ये भी पता चला कि पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे साल का छात्र और हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। आरोप है कि इसी के जरिए बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध किया गया और सॉल्वरों को केंद्र के अंदर एंट्री दिलाई गई।
कुल 30 लोग गिरफ्तार
इसमें अब तक पुलिस द्वारा कुल नौ साल्वर को गिरफ्तार किया गया। जो सभी मेडिकल छात्र हैं। इसके साथ ही बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों को मिलाकर कुल 30 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
10 से 12 लाख में हुआ सौदा
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हर एक अभ्यार्थी से 10 से 12 लाख रुपए में सौदा किया जाता था। एडवांस में दो लाख रुपए लिए जाते थे। तो वहीं बाकी की राशि परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद। इस मामले में जांच जारी है और अभी और भी नाम सामने आने की उम्मीद है।


