उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) नीति बनाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। उद्योग विभाग द्वारा तैयार इस नीति का वित्त विभाग परीक्षण कर चुका है और परिवहन विभाग से संबंधित प्रविधानों पर उसका मत मांगा गया है।
परिवहन विभाग के मत के बाद इसे जल्द कैबिनेट के समक्ष स्वीकृति के लिए रखा जा सकता है। प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में शत-प्रतिशत छूट, महिलाओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन तथा चार्जिंग अवसंरचना के विकास के लिए आकर्षक सब्सिडी का प्रविधान किया गया है।
उत्तराखंड को सबसे अधिक ईवी अनुकूल पर्वतीय राज्य बनाने का प्रयास
प्रदेश सरकार उत्तराखंड को देश का सबसे अधिक ईवी अनुकूल पर्वतीय राज्य बनाने को प्रयासरत है। इसके लिए दोपहिया, सार्वजनिक परिवहन, व्यावसायिक चारपहिया वाहनों और लास्ट माइल लाजिस्टिक्स क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही प्रदेशभर में सुरक्षित, सुलभ और किफायती चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा।
प्रस्तावित नीति में ईवी विनिर्माण और सहायक उद्योगों में पांच से सात हजार करोड़ रुपये तक निवेश आकर्षित करने तथा छह से 12 हजार लोगों के लिए रोजगार सृजित करने का भी लक्ष्य रखा गया है। चार्जिंग अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मैदानी क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर स्थायी पूंजी निवेश का 80 प्रतिशत तथा पर्वतीय क्षेत्रों में 90 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
वहीं 14 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 200 चार्जिंग प्लग पर अधिकतम 10 लाख रुपये और 120 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 20 प्लग पर 25 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है। साथ ही राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रत्येक 50 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना है।
अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह ने बताया कि नीति पर परिवहन विभाग से मत देने को कहा गया है। इस पर कार्य चल रहा है।


