52 हजार दुग्ध उत्पादक परिवारों को राहत, लालकुआं संघ के 34 हजार पशुपालकों के लिए बड़ी सौगात।दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने जताया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा का आभार।

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52 हजार दुग्ध उत्पादक परिवारों को राहत, लालकुआं संघ के 34 हजार पशुपालकों के लिए बड़ी सौगात।

दूध मूल्य प्रोत्साहन, साईलेज और चारा परिवहन के लिए 30 करोड़ स्वीकृत, लालकुआं संघ को करीब 17.5 करोड़ मिलने का अनुमान।

लालकुआं। दुग्ध उत्पादन से जुड़े प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है। दुग्ध उत्पादकों के हित में सरकार ने 30 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इससे प्रदेश के करीब 52 हजार दुग्ध उत्पादक परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। लालकुआं नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ से जुड़े करीब 34 हजार दुग्ध उत्पादक परिवार भी इस निर्णय के दायरे में आएंगे।

नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने इस निर्णय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक मजबूती देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति देने वाला है।

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इन तीन मदों में खर्च होगी 30 करोड़ की राशि।

स्वीकृत 30 करोड़ रुपये की धनराशि में 14 करोड़ रुपये दूध मूल्य प्रोत्साहन, 13 करोड़ रुपये साईलेज अनुदान और 3 करोड़ रुपये चारा परिवहन अनुदान के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को उत्पादन लागत के दबाव से राहत देने के साथ पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

लालकुआं संघ के हिस्से में करीब 17.5 करोड़!

प्रेस नोट के अनुसार लालकुआं दुग्ध संघ को दूध मूल्य प्रोत्साहन मद में करीब 8.5 करोड़ रुपये, साईलेज अनुदान में करीब 7.5 करोड़ रुपये और चारा परिवहन अनुदान में लगभग 1.5 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। कुल मिलाकर यह राशि करीब 17.5 करोड़ रुपये बैठती है,इससे लालकुआं दुग्ध संघ से जुड़े हजारों पशुपालकों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

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चारा महंगा, ढुलाई महंगी—अनुदान से राहत की उम्मीद।

पशुपालकों के सामने बढ़ती लागत सबसे बड़ी चुनौती है। दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था और उसे दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाना किसानों की लागत बढ़ाता है। ऐसे में साईलेज अनुदान और चारा परिवहन अनुदान से पशुपालकों को कुछ राहत मिल सकती है।

मुकेश बोरा ने कहा कि साईलेज अनुदान से पशुओं के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ेगी, जबकि चारा परिवहन अनुदान से परिवहन पर होने वाला खर्च कम होगा। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत होंगी।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं दुग्ध उत्पादक।

मुकेश बोरा ने कहा कि प्रदेश के करीब 52 हजार दुग्ध उत्पादक परिवार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। ऐसे में सरकार की ओर से प्रोत्साहन और अनुदान मिलने से पशुपालकों को आर्थिक संबल मिलेगा और दुग्ध व्यवसाय को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने दुग्ध उत्पादकों के हित में धनराशि स्वीकृत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पशुपालक मजबूत होंगे तो गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, और सरकार का यह निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है

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