हल्दूचौड़ में पारंपरिक रंगों की बौछार: पत्रकारों ने होली महोत्सव में बिखेरी सांस्कृतिक छटा

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हल्दूचौड़ (नैनीताल)। नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (एनयूजे) उत्तराखंड के तत्वावधान में हल्दूचौड़ प्रेस क्लब में पारंपरिक होली महोत्सव बड़े ही उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।

महोत्सव का नेतृत्व जिला अध्यक्ष नैनीताल धर्मानंद खोलिया ने किया, जबकि कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती दया जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर जिला महासचिव ईश्वरी दत्त भट्ट, जिला उपाध्यक्ष शंकर पांडे, जिला सूचना अधिकारी गिरजा शंकर जोशी विशेष रूप से मौजूद रहे।

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कार्यक्रम में अन्य प्रमुख उपस्थित लोगों में—
पत्रकार कंचन परिहार, कपिल परगाई, लालकुआं नगर इकाई अध्यक्ष राकेश सिंह, नगर इकाई सदस्य पंकज पांडे, मुन्ना अंसारी, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष चंदू खोलिया, दलीप सिंह गढ़िया, वरिष्ठ पत्रकार भगवान सिंह गंगोला, पत्रकार राजेंद्र पंत’ रमाकांत, प्रमोद बमेटा, मुकेश कुमार, ग्राम प्रधान रमेश चंद जोशी, पूर्व प्रधान शंकर जोशी, पूर्व प्रधान बीडी खोलिया, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अंडोला, भोला दत्त कफल्टिया, गदरपुर के पत्रकार जसपाल डोगरा, गूलरभोज के पत्रकार जीवन सिंह नयाल, भाजपा नेता दीपेंद्र कोश्यारी, कांग्रेस नेता नंदन दुर्गापाल, ग्राम प्रधान प्रदीप आर्य, सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पाठक, बलवंत सिंह मेहरा, रवि कबड़वाल, राजेश अधिकारी, क्षेत्र पंचायत सदस्य चिंतामणि पांडे, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भुवन पवार, जफर अली, चंदन सिंह बिष्ट, गितेश त्रिपाठी, एजाज हुसैन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होलियारों को गुड़ खिलाकर और टोपी पहनाकर की गई, जिससे पूरा वातावरण कुमाऊँनी संस्कृति के रंग में रंग गया। इसके बाद बैठकी होली और लोकगायन का दौर शुरू हुआ।

“अंबा के भवन में विराजे होली” और “खोल दे माता, खोल भवानी” जैसे पारंपरिक होली गीतों पर होलियारों ने सुर, ताल और भाव के साथ मनमोहक प्रस्तुति दी। होली धुनों के बीच पूरा परिसर रंग, अबीर-गुलाल और उल्लास से सराबोर हो गया।

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यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि कुमाऊँनी सांस्कृतिक विरासत, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में भी पारंपरिक लोकसंस्कृति को संजोकर आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है

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