
नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेतालघाट से एक स्कूल की तस्वीर सामने आई है। जहां बच्चियों की आंखों में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा साफ देखा जा सकता है। जेन-जी के बाद अब जेन अल्फा सड़कों पर उतर आई है।
नैनीताल के बेतालघाट से वीडियो आया सामने
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वक्त वीर आंदोलनकारी गुरजन सिंह गुंज्याल द्वारा दिया गया नारा “आज दो अभी दो उत्तराखंड राज दो” तो आपने जरूर सुना होगा। लेकिन आज उसी अलग राज्य उत्तराखंड में बच्चे टीचर दो आज दो अभी दो
के नारे लगाने पर मजबूर हैं। नैनीताल के बेतालघाट से आया ये वीडियो हमारे पहाड़ों में शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल रहा है।
नैनीताल में शिक्षकों के सारे पद खाली
इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जहां 10वीं, 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाली छात्राएं राज्य आंदोलन की तरह ही टीचर दो आज दो अभी दो का नारा लगाने को मजबूर हैं। जीजीआईसी बेतालघाट के उपलब्ध पद विवरण के मुताबिक, इंटर स्तर पर पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के कुल 9 पद स्वीकृत हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन 9 में से पूरे 9 पद खाली पड़े हैं।
स्नातक स्तर पर 5 पद सालों से खाली
स्नातक स्तर पर जहां 10 पद स्वीकृत हैं। वहां 5 पद सालों से खाली पड़े हैं। जिसके बाद अब इन छात्राओं ने आर पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सरकार और शिक्षा विभाग से इन सभी खाली पड़े पदों को भरने की मांग की है। हालांकि ये सिर्फ नैनीताल की ही कहानी नहीं है बल्कि उत्तराखंड के ज्यादातर पर्वतीय इलाकों का यही हाल है।
उत्तराखंड के 1149 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं
3 अप्रैल 2025 को ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया कि उत्तराखंड के 1149 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। वैसे तो हमारे शिक्षा मंत्री बड़े बड़े दावे करते नहीं थकते। बड़े-बड़े मंचों से शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के उत्तराखंड में सिंगापुर जैसा स्टडी मॉडल लागू करने।
उत्तराखंड में शिक्षा मंत्री के दावे हवा-हवाई
प्रदेश के हर स्कूल में शत-प्रतिशत शिक्षकों की तैनाती करने जैसे दावे करते हैं। लेकिन ऐसी वीडियोज और खबरें आने के बाद ऐसा लगता है कि शिक्षा मंत्री जी के ये तमाम दावे और वादे उनके किसी रिमोट कंट्रोल वाले बादलों के साथ ही कहीं दूर हवा में उड़ गए हैं।
पहाड़ों में शिक्षक नहीं करना चाहते नौकरी
हमारे राज्य की सबसे बड़ी बदकिस्मती ये है कि जिस पहाड़ी इलाके के विकास की सोच के साथ हमारा राज्य बना था उन्हीं पहाड़ों में आज ज्यादातर शिक्षक खुद ही नौकरी नहीं करना चाहते। जैसे ही किसी शिक्षक की पोस्टिंग पहाड़ के किसी दूरदराज गांव या कस्बे में होती है। वैसे ही वो सुगम इलाकों में अपना तबादला करवाने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाते हैं।
शिक्षकों की जगह मिलता है केवल आश्वासन
कैसी-कैसी जुगत लगाते हैं। खैर राज्य में इससे पहले भी शिक्षकों की मांग को लेकर कई बार आवाजें उठीं हैं लेकिन हर बार स्कूलों को शिक्षकों की जगह आश्वासन मिलता है। हमारे शिक्षा मंत्री बंद कमरों में बैठकर सौ फीसदी टीचर होने के ढोल पीटते रहते हैं। लेकिन लगातार आती ऐसी खबरें और वीडियोज मंत्री जी के दावों की पोल खोल देती हैं।


