

मुख्यमंत्री धामी ने किए मां वाराही के दर्शन, देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने और मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण की कही बात
भौगोलिक संदर्भ
चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के अद्भुत संगम के बीच चार खाम और सात थोक के योद्धाओं ने फलों और फूलों से अनूठी बग्वाल खेली। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां वाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। साथ ही देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की घोषणा की।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में गढ़वाल खाम भवन और रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों के विकास कार्य प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई बग्वाल
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पाटी विकासखंड स्थित मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल का शुभारंभ हुआ। इसके बाद वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया खाम के बग्वालियों ने पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगी पगड़ियों में मैदान में प्रवेश किया। बांस और रिंगाल से बनी ढालों के साथ शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच ऐतिहासिक युद्ध शुरू हुआ।
इस वर्ष दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई बग्वाल 1:55 बजे समाप्त हुई। करीब आठ मिनट तक चले इस अनूठे आयोजन में पत्थरों के स्थान पर फल और फूलों का प्रयोग किया गया। फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंज उठा। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने बताया कि फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। उन्होंने खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी निभाई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मां वाराही की यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यह परंपरा अनुशासन, भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल है, जहां युद्ध के बाद सभी योद्धा आपस में गले मिलते हैं।
इस दौरान बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


