
देहरादून। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बार फिर प्रयास तेज किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में हाई कोर्ट का स्थायी परिसर बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की। इस दौरान आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण और वन भूमि के उपयोग की अनुमति से जुड़े मामलों को जल्द आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया।उत्तराखंड समाचार पत्रिका
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नैनीताल में मौजूदा हाई कोर्ट परिसर कई तरह की चुनौतियों से घिरा है। चाइना पीक की तलहटी में स्थित होने के कारण यहां भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा पर्यटन सीजन में बढ़ने वाला यातायात और पर्यटकों की आवाजाही भी परेशानी पैदा करती है। न्यायालय में आने वाले न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी आवागमन और पार्किंग से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सीएम धामी ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रदेश में आधुनिक न्यायिक आधारभूत ढांचे का विकास जरूरी है। हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित जगह सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर तरीके से जुड़ी हुई है। यहां हाई कोर्ट का स्थायी परिसर बनने से न्यायिक कार्यों के विस्तार के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। इससे न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम लोगों को भी सुविधा मिलेगी।नक्शे देखें
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के नए परिसर के निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि नए भवन के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने और तय समयसीमा में उसका कब्जा एवं हस्तांतरण सुनिश्चित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से लामाचौड़ क्षेत्र की आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण और डायवर्जन से जुड़े प्रस्ताव पर जल्द आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री की ओर से रखे गए प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में आधुनिक और स्थायी हाई कोर्ट परिसर विकसित होने से उत्तराखंड की न्यायिक आधारभूत संरचना मजबूत होगी और लोगों को न्यायिक सेवाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी


