
नैनीताल/हल्द्वानी। हल्द्वानी के हीरानगर स्थित केवीएम स्कूल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद के सभी निजी विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों का संयुक्त निरीक्षण एवं सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान अग्नि सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक मजबूती, आपदा प्रबंधन व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार 4 जून 2026 को होटल, गेस्ट हाउस, होम-स्टे, मॉल, बैंक्वेट हॉल और अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों के निरीक्षण के लिए गठित समितियां अब अपने-अपने क्षेत्राधिकार में संचालित निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का भी संयुक्त सुरक्षा ऑडिट करेंगी। निरीक्षण पूरा होने के बाद समितियों को 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपनी होगी।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों में आग लगने और अन्य दुर्घटनाओं की घटनाओं को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से व्यापक स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले संस्थानों की मान्यता, पंजीकरण और संचालन संबंधी वैध दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही फायर एनओसी की उपलब्धता, उसकी वैधता और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन का परीक्षण होगा। टीम यह भी जांचेगी कि संस्थान में अग्निशामक यंत्र, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम, हाइड्रेंट और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं या नहीं और वे कार्यशील स्थिति में हैं या नहीं।
भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत क्षमता के मुकाबले विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, कक्षाओं और गलियारों की चौड़ाई तथा निकास मार्गों की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाएगा। विद्युत वायरिंग, डीजी सेट, इन्वर्टर और अन्य संभावित अग्नि जोखिम वाले उपकरणों की जांच भी निरीक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
जिला प्रशासन संस्थानों की आपदा प्रबंधन तैयारियों की भी समीक्षा करेगा। इसके तहत डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, इवैक्यूएशन प्लान, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और नियमित मॉक ड्रिल के आयोजन की स्थिति को परखा जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को अग्निशमन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं।
छात्राओं की सुरक्षा को भी निरीक्षण में विशेष महत्व दिया गया है। पृथक शौचालय, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, शिकायत निवारण तंत्र, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की जांच की जाएगी। इसके अलावा प्रवेश और निकास नियंत्रण व्यवस्था तथा आपातकालीन संपर्क प्रणाली की भी समीक्षा होगी।
प्राथमिक उपचार की व्यवस्था, चिकित्सा आपातकालीन सहायता, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और स्वास्थ्यकर वातावरण का भी मूल्यांकन किया जाएगा। वहीं जहां स्कूल परिवहन व्यवस्था संचालित करते हैं, वहां स्कूल बसों और अन्य वाहनों के सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि अधिक छात्र संख्या वाले निजी विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। निरीक्षण के दौरान यदि कोई गंभीर अनियमितता या जनसुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थिति पाई जाती है तो तत्काल कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर संबंधित अधिनियमों और नियमों के तहत विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।


