खड़िया खनन मामला…हाईकोर्ट के ये निर्देश, मांगी रिपोर्ट

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले की कांडा तहसील के कई गांवों सहित पूरे जिले में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर पंजीकृत जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश श्री जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट द्वारा खदानों में खनन पर रोक लगाने के बाद बचे हुए खनन सामग्री की जानकारी मांगी है।

खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की विस्तृत सुनवाई की और खनन अधिकारी से खदानों की गहन जांच करने, साथ ही पुलिस अधीक्षक से कोर्ट के पूर्व आदेशों के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च 2025 को तय की गई है।

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मामले के अनुसार, कांडा तहसील के ग्रामीणों ने पहले मुख्य न्यायधीश को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि खड़िया खनन से उनकी खेती, घर, और पानी की लाइनों को भारी नुकसान हुआ है। जिन लोगों के पास धन था, उन्होंने हल्द्वानी और अन्य स्थानों पर अपना आशियाना बना लिया है, जबकि अब केवल निर्धन लोग ही गांवों में रह गए हैं।

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इन ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कार्यों के कारण उनके आय के साधनों पर भी संकट आ गया है, और कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में उन्होंने न्यायालय से समाधान की गुहार लगाई है।

यह महत्वपूर्ण है कि 6 जनवरी 2025 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले में खड़िया खनन पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

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