
नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में जमीन के नामांतरण से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैंचीधाम तहसील के ग्राम मल्ला निगलाट में आरोप है कि वर्ष 1983 में दिवंगत हो चुके व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर उसका फर्जी वारिस तैयार कर दिया गया। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे खाता संख्या 08 में नाम दर्ज कराया गया और महज एक महीने के भीतर संबंधित जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम बेच दी गई।
ऑनलाइन रजिस्ट्री ने खोला फर्जीवाड़े का राज
मामले का खुलासा तब हुआ, जब ग्रामीणों ने जमीन से संबंधित ऑनलाइन रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखों की जांच की। अभिलेखों में संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत प्रशासन से की।
आरोप है कि नामांतरण के लिए फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु वर्ष 1983 में हो चुकी थी, उसे ही कागजी प्रक्रिया में वारिस के रूप में सामने लाकर जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया।
आयुक्त दीपक रावत ने लिया कड़ा संज्ञान
शिकायत सामने आने के बाद कुमाऊं मंडल आयुक्त दीपक रावत ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जिलाधिकारी नैनीताल को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच में यदि फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित मृत्यु प्रमाणपत्र की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
राजस्व कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले ने राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिस व्यक्ति की मृत्यु दशकों पहले हो चुकी थी, उसके नाम से वारिस और फिर जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी?
इसी पहलू को देखते हुए आयुक्त ने फर्जीवाड़े में किसी राजस्व कार्मिक की संलिप्तता पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।नामांतरण के कुछ ही समय बाद जमीन का किसी अन्य व्यक्ति के नाम बिक्री होना भी जांच का अहम बिंदु माना जा रहा है।
जमीन के कागजों पर नजर रखने की अपील
आयुक्त दीपक रावत ने आम जनता से अपनी जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों और नामांतरण की प्रविष्टियों की नियमित निगरानी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपने भूमि रिकॉर्ड में संदिग्ध प्रविष्टि या नामांतरण दिखाई देता है तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि 1983 में दिवंगत व्यक्ति के नाम पर कथित फर्जी वारिस कैसे तैयार हुआ, नामांतरण किस आधार पर हुआ और इसके बाद जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।


