
बेसहारा गोवंश बना हल्दूचौड़ में मुसीबत का सबब, हादसों और फसल नुकसान से ग्रामीण बेहाल!
सड़कों पर डेरा जमाए गोवंश से बढ़ा दुर्घटनाओं का खतरा, खेतों में फसलें हो रहीं बर्बाद; 15 दिन का अल्टीमेटम, समाधान नहीं हुआ तो तहसील में धरने की चेतावनी!
हल्दूचौड़। क्षेत्र में बेसहारा गोवंश की बढ़ती समस्या अब ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती जा रही है। सड़कों पर झुंड के रूप में बैठे गोवंश के कारण जहां आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है, वहीं बड़े-बड़े सांड और छोटे बछड़ों के झुंड किसानों की खड़ी फसलों को भी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। समस्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।
इसी समस्या को लेकर सुराज सेवादल की जिलाध्यक्ष कीर्ति दुम्का के नेतृत्व में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लालकुआं तहसीलदार ईश्वर रावत को ज्ञापन सौंपकर बेसहारा गोवंश की समस्या का तत्काल समाधान किए जाने की मांग की।
ज्ञापन सौंपते हुए कीर्ति दुम्का ने कहा कि हल्दूचौड़ क्षेत्र में बेसहारा गोवंश लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। सड़क पर अचानक गोवंश के आ जाने और झुंड के रूप में बैठे रहने से वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इन हादसों में कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को भी सड़कों पर घूमते गोवंश के कारण परेशानी और खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि समस्या केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े-बड़े सांड और बछड़ों के झुंड खेतों में घुसकर किसानों की मेहनत से तैयार फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
‘कई बार सौंप चुके हैं ज्ञापन, फिर भी नहीं जागा प्रशासन’
सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेसहारा गोवंश की समस्या को लेकर ग्रामीण कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनके पास पूर्व में दिए गए ज्ञापनों की प्रतियां भी मौजूद हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बेसहारा गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और सड़कों से हटाने की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
15 दिन का समय, समाधान नहीं तो तहसील में धरना
ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए 15 दिन का समय लिया गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में समस्या का तत्काल प्रभाव से समाधान नहीं किया गया तो वे लालकुआं तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल किसानों की फसल का मामला नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और आमजन के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब देखना होगा कि प्रशासन 15 दिन की अवधि में इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है या फिर ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
ज्ञापन देने वालों में सुराज सेवादल की जिलाध्यक्ष कीर्ति दुम्का, सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी, क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपक दुम्का, चिंतामणि पांडे, कमला जोशी, पुष्पा कोरंगा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे


