UCC in Uttarakhand: उत्तराखंड में UCC के तहत नया निकाहनामा लाएगा वक्फ बोर्ड, क्या-क्या होंगे प्रावधान?

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मौलवी द्वारा जारी आधिकारिक निकाहनामा के आधार पर ही दूल्हा-दुल्हन उत्तराखंड सरकार के UCC मैरिज रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपनी शादी का ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे।

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उत्तराखंड में UCC के तहत नया निकाहना

UCC in Uttarakhand News: उत्तराखंड में मुस्लिम समुदाय के लिए UCC के प्रावधानों के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार किया जा रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने बताया कि बोर्ड की पिछली बैठक में नए निकाहनामे को लाने का फैसला किया गया था। वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि इन्हीं प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम समुदाय के लिए नया निकाहनामा तैयार किया जा रहा है, ताकि निकाह से जुड़े दस्तावेज में UCC के नियमों का स्पष्ट रूप से पालन सुनिश्चित हो सके। पहले निकाहनामा में पहला, दूसरा, तीसरा निकाह का कॉलम होता था। इसमें एक ही निकाह का कॉलम होगा।

  • तलाक कहा और तलाक हो गया, UCC में इसको को अपराध की श्रेणी में माना गया
  • परिवार को जोड़ना का प्रयास करना अनिवार्य है
  • कोई भी व्हाट्सएप्प पर तलाक नहीं देगा
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हलाला कुप्रथा को अपराध माना गया

कोई भी मौलाना या व्यक्ति ऐसा कराने का प्रयास करता है तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को उन परिस्थितियों और संभावित कानूनी मुश्किलों से बचाना है, जो UCC के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर सामने आ सकती हैं।

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नए निकाहनामा नियम में क्या-क्या बदलेगा?

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब कोई भी अनधिकृत व्यक्ति निकाह नहीं पढ़ा सकेगा। केवल राज्य सरकार या वक्फ बोर्ड से लाइसेंस प्राप्त और पंजीकृत मौलवी द्वारा कराया गया निकाह ही वैध माना जाएगा। मौलवी द्वारा जारी आधिकारिक निकाहनामा के आधार पर ही दूल्हा-दुल्हन उत्तराखंड सरकार के UCC मैरिज रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपनी शादी का ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे।

सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

अक्सर गलत निवास प्रमाण पत्र, आयु या पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाकर निकाह कराने या पहचान छिपाकर अंतर-धार्मिक विवाह करने के मामले सामने आते हैं। नए नियमों से ऐसे फर्जीवाड़ों पर लगाम लगेगी। कई बार विवाद होने पर गवाहों या निकाह कराने वाले मौलवी का कोई लिखित रिकॉर्ड न होने से महिलाओं को अदालत में गुजारा भत्ता, मेहर या अधिकारों के लिए भटकना पड़ता है। आधिकारिक रिकॉर्ड से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। राज्य सरकार के पास विवाह का एक प्रामाणिक डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड रहेगा, जिससे कानूनी दावों के समय सत्यापन आसान हो जाएगा।

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