
पीपलकोटी THDC टनल हादसे में 7 की मौत, 3 अब भी अंदर फंसे। रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। टनल में अचानक भूधंसाव के साथ मलबा और पानी भरने से कई कर्मचारी अंदर फंस गए।
हादसे के बाद से जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य राहत-बचाव टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। शुक्रवार सुबह तक हादसे में सात कर्मचारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तीन कर्मचारी अभी भी टनल के अंदर फंसे बताए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, चमोली के मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में THDC की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन TRT टनल में गुरुवार शाम करीब 7:05 बजे मलबा और पानी आने की सूचना मिली।
बताया गया कि टनल में काम कर रहे कर्मचारी अचानक हुए भूधंसाव और पानी के रिसाव के बीच फंस गए।
करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में आया मलबा और पानी
जिला प्रशासन के अनुसार TRT टनल की कुल लंबाई करीब 3 किलोमीटर है।
टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे कर्मचारी फंस गए।
घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। शुरुआती जानकारी में 18 से 19 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी।
बाद में कुल 22 कर्मचारियों के टनल के अंदर होने की जानकारी सामने आई। कई कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि कुछ के घायल होने की सूचना है।
सात मौतों की पुष्टि, तीन को निकालने की कोशिश जारी
शुक्रवार सुबह अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने जानकारी दी कि हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, तीन फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है।
हादसे के बाद रेस्क्यू किए गए घायल कर्मचारियों को विवेकानंद अस्पताल, पीपलकोटी में भर्ती कराया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों के उपचार और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
डीएम और एसपी घटनास्थल पर डटे
जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार घटनास्थल पर मौजूद हैं और राहत-बचाव अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जिलाधिकारी स्वयं रातभर मौके पर रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।
घटनास्थल पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी, स्थानीय पुलिस, सीआईएसएफ और अन्य बचाव दलों को तैनात किया गया है। टनल के भीतर मलबा और पानी होने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सीएम धामी ने आपदा परिचालन केंद्र से ली जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित आपदा परिचालन केंद्र पहुंचकर पीपलकोटी टनल हादसे में चल रहे राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए टनल में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
सीएम धामी ने रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
लापता लोगों की जानकारी के लिए हेल्पलाइन जारी
हादसे के बाद लापता कर्मचारियों और उनके संबंध में जानकारी लेने के लिए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
हेल्पलाइन नंबर
0135-2710334
82188 67005
1070
परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर टनल हादसे से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
बारिश और भूस्खलन के बीच बढ़ी चुनौती
इन दिनों उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में पीपलकोटी टनल हादसे में भी मलबा और पानी राहत-बचाव कार्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
चमोली जिला पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। जिले में पिछले वर्षों में रैणी आपदा, जोशीमठ भूधंसाव और तमकनाला जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
जोशीमठ भूधंसाव ने भी बढ़ाई थी चिंता
साल 2023 में जोशीमठ में बड़े पैमाने पर भूधंसाव की घटना ने पूरे देश का ध्यान उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते भू-जोखिम की ओर खींचा था।
कई घरों और भवनों में दरारें पड़ने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था। भूधंसाव की स्थिति गंभीर होने पर जोशीमठ के कुछ बड़े होटलों को भी ध्वस्त किया गया था।
इससे पहले रैणी क्षेत्र में भीषण आपदा ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर चमोली की आपदा संवेदनशीलता और पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान टनल के अंदर फंसे तीन कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने और रेस्क्यू अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने पर है। हादसे में मृतकों और घायलों का आंकड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद और स्पष्ट हो सकेगा।


