मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में होगा कई गुना इजाफा, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर जोर!

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अंतरराज्यीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ ने बताए सफलता के गुर!

(प्रयागराज)। कृषि के साथ मधुमक्खी पालन अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। यह न केवल शहद उत्पादन का बेहतर माध्यम है, बल्कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बात कोऑपरेटिव रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के मधुमक्खी पालन प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने कही।

मोतीलाल नेहरू फार्मर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, इफको परिसर फूलपुर में आयोजित चार दिवसीय अंतरराज्यीय विशेष कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी गई। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि रानी मधुमक्खी पूरे छत्ते की आधार होती है और उसके सही प्रबंधन पर ही उत्पादन निर्भर करता है। कार्यकर्ता मधुमक्खियां फूलों से पराग और मकरंद एकत्र कर शहद तैयार करती हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

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उन्होंने किसानों को छत्तों की नियमित निगरानी, फ्रेम प्रबंधन, रानी मधुमक्खी की सुरक्षा तथा शहद संग्रह के लिए सुपर बॉक्स के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों के लिए अनुकूल वातावरण और फूलों की पर्याप्त उपलब्धता होने पर शहद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

प्रशिक्षण में मौजूद किसानों को मधुमक्खी पालन को स्वरोजगार और आय संवर्धन के सशक्त साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मधुमक्खी पालन से जुड़ी विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं तथा विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी लिए

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