एडवेंचर स्पोर्टस के नाम पर कंपनिया कमा रहीं मोटा पैसा, लेकिन सुरक्षा का क्या?

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बंजीजंपिंग, जिपलाइनिंग और राफ्टिंग, ऐसे कई एडवेंचर स्पोर्टस हैं जिसके लिए हजारों लोग उत्तराखंड आते हैं। लेकिन अगर हम कहें की ये एडवेंचर स्पोर्ट लोगों को जितना उत्साहित करते हैं, उतने ही लोगों की जान भी हर साल ले लेते हैं। हाल ही में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में बंजी जंपिंग के बाद 21 साल के लड़के की जान चले गई। चलिए इस आर्टिकल में जानते है इन एडवेंचर एक्टिविटी का वो सच जिसे सुनने के बाद आप इन एक्टिविटिज को करने के बारे में दो बार सोचेंगे।

एडवेंचर स्पोर्टस के नाम पर कंपनिया कमा रहीं मोटा पैसा

दरअसल ये कोई पहला वाक्या नहीं है, जिसमें इन एडवेंचर एक्टिविटी को करने पर किसी जान की हानी ना हुई हो। ऐसे ही ना जाने कितने लोग हर साल उत्तराखंड आते हैं। और इस एडवेंचर टूरिस्म के नाम पर अपनी जान गंवा देते हैं। ऋषिकेश, टिहरी, नैनीताल, कर्णप्रयाग उत्तराखंड के किसी भी जिले या शहर की बात कर लो सब जगह ऐडवेंचर ऐक्टिवीटिंज के नाम पर लोगों ने हर गली में अपनी दुकानें तो खोल ली हैं।

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ऊंचाई और रोमांच के नाम पर ये खूब नोट भी छाप रहे हैं। इंस्टाग्राम फेसबुक जैसे सोशल मीडिया हैंडल में ऑपरेटरस रीलस और वीडीयोज डालकर लोगों को खूब लुभाते हैं। लेकिन सुरक्षा के इंतज़ाम इन दुकानों में शून्य रहते हैं।

एडवेंचर ऐक्टिवीटिज के लिए कड़ी गाइडलाइन

हालांकि केंद्र और राज्य सरकार ने भी ऐसी एडवेंचर ऐक्टिवीटिज को लेकर स्ट्रिक्ट गाइडलाइंस बनाई हैं। जैसे हर साइट पर प्रशिक्षित जंप मास्टर होना चाहिए, रस्सियों और इक्यूपमेंट्स की रेगुलर जांच होनी चाहिए, किसी को भी कोई भी ऐडवेंचर स्पोर्ट करने से पहले मेडिकली फिट होना चाहिए।

मेडिकल चेकअप अनिवार्य

जिसके लिए मेडिकल चेकअप होना भी कंपलसरी होता है। इसी के साथ इमरजेंसी के लिए रेस्क्यू टीम और फर्स्ट एड होना चाहिए। लेकिन इस सारे नियम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर ये कंपनीयां मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की जान ही दाव पर लगा देती हैं।

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गली-गली में खुल रही एडवेंचर के नाम पर दुकान

असल में उत्तराखंड की गली-गली में खुली इन एडवेंचर टूरिज्म की दुकानों में बेसिक सुविधाएं तक नहीं हैं। कई जगह हलात ये बताई जाती है कि वहां ना ठीक से हेल्थ चेकअप होता है ना वहां पर प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होता है। मेडिकल स्क्रीनिंग तो इन जगहों पर एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ भी होती। फॉर्म भरवाओ, टिकट काटो और लोगों की जान जोखिम में डाल दो।लिहाजा अगर कहीं किसी के साथ ऐडवेंचर ऐक्टिवीटीज करते हुए कुछ गलत होता है तो उस वक्त उन्हें बचाने वाला भी कोई नहीं होता।

सुरक्षा के नाम पर वही पुराना जुगाड़

ना तो इन लोगों को ना तो इमरजेंसी हैडल करनी आती है और ना ही सेफटी लॉग को मेंटेन करना। ये ऑपरेटरस इंस्टाग्राम पर खूब शानदार वीडियोज डालकर लोगों को लुभाते हैं जिसके बाद यहां आने वाले टूरिस्टों से मोटा मुनाफा कमाते हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर वही पुराना जुगाड़ चलाते दिखते हैं। हैरत की बात ये है कि रोमांच के नाम पर मोटी कमाई करने वाले इन ऑपरेटरस की ना तो जांच होती है और ना ही किसी की जान जाने पर कुछ स्ट्रिक्ट ऐक्शन।

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एडवेंचर साइट का होना चाहिए ऑडिट

जिसके चलते अब इन लोगों ने कानून से डरना भी छोड़ दिया है। हमारे राज्य में इस बात की जरूरत है कि सरकार सिर्फ नियम बनाने तक सीमित न रहे। बल्कि हर एडवेंचर साइट का नियमित सुरक्षा ऑडिट करवाए। उपकरणों की जांच करवाए। स्टाफ की ट्रेनिंग की पड़ताल कराई जाए। साथ ही हर मोड़ पर खुले ये फर्जी एडवेंचर सेंटर बंद कराए जाएं

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