देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” पर गोष्ठी का आयोजन

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1947 का भारत विभाजन एक ऐसी त्रासदी जिसमें नफ़रत की पराकाष्ठा थी : डॉ. अनिल कुमार दीक्षित, देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय

देहरादून! विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत में 14 अगस्त को मनाया जाने वाला एक वार्षिक राष्ट्रीय स्मृति दिवस है, जो 1947 के भारत विभाजन के दौरान मासूम पीड़ितों एवं भारतीय शणनार्थियों के कष्टों की याद दिलाता है। इस विभाजन विभीषिका दिवस को पहली बार 2021 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद मनाया जाना शुरू हुआ था। यह दिवस 1947 में भारत विभाजन के दौरान अनेक भारतीयों को हुई पीड़ा को याद करता है। विभाजन में कई परिवार विस्थापित हुए और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई।

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गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए विधि विभाग देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के संकायअध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि, इस दिवस का उद्देश्य भारतीय जनमानस को असामंजस्यता से घिरा सामाजिक विभाजन से उत्पन्न नफ़रत को दूर करना तथा एकता व सामाजिक सद्भाव एवं मानव सशक्तिकरण की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता को प्रबल करने की सीख दिलाना है।

डॉ दीक्षित ने भारत पाकिस्तान विभाजन के परिणाम से हुई मानव हानि पर चर्चा करते हुए कहा कि विभाजन कि नफ़रत के कारण करीब 2 करोड़ भारतीय विस्थापित हुए और तकरीबन 20लाख निर्दोष लोग मारे गए। इस मानवीय त्रासदी और भारत की स्वतंत्रता के बीच सबसे बड़ी कीमत वो दर्द है जो इतिहास में भी दर्ज नहीं है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन उस स्वतंत्रता के साथ देश का विभाजन भी हुआ। इसलिए आजादी का उत्सव जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक उन लाखों लोगों को याद करना भी है, जिन्होंने विभाजन की हिंसा में अपने घर, परिवार, संपत्ति और जीवन तक खो दिए।
डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने इतिहास के पन्नों का खुलासा करते हुए बताया की दिल्ली कैन्ट से लगा हुआ प्रेमनगर औऱ देहरादून कैन्ट से लगा हूआ प्रेमनगर इसी त्रासदी की कहानी बताता है जिनका जन्म इस विभाजन के पीड़ित शणनार्थियों को सरकार ने इसी जगह आश्रय प्रदान कराया था औऱ देश के सैनिकों ने साल महीनो तक इनक पोषण कर सामान्य धारा में लाने के लिये इनकी मदद की, तभी से इन जगहों का नाम प्रेमनगर पड़ गया अंत में छात्र-छात्राओं, ने दो मिनट का मौन रख कर 14 अगस्त 1947 में भारत देश विभाजन के कारण अपनी जान गवाने वाले को श्रद्धांजलि अर्पित की औऱ अपनी जड़ो से विस्थापित होने वाले सभी परिवारों को शत शत नमन किया जो आज दुबारा अपने पैरो पर खड़े हो कर भारत माता की सेवा में डटे हुए है,गोष्ठी का संचालन सुश्री आकांशा भट्ट ने किया

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