Modi Cabinet New List: संसद के मॉनसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की तैयारी है। पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास देश के नए वित्त मंत्री बन सकते हैं, जबकि नीट विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल संभव है।
Modi Cabinet New List: संसद के आगामी मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले देश के सियासी गलियारों में एक बहुत बड़ी हलचल शुरू हो गई है. दिल्ली के राजनीतिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल करने जा रहे हैं. इस संभावित बदलाव के तहत कई बड़े मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि कुछ विवादों में घिरे मंत्रियों के विभागों को पूरी तरह बदला जा सकता है. सबसे बड़ा उलटफेर वित्त मंत्रालय में देखने को मिल सकता है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को देश का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय की एक नई और भारी-भरकम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी पर संकट
इस पूरे फेरबदल की सबसे मुख्य वजह हाल ही में देश को हिलाकर रख देने वाला नीट (NEET) पेपर लीक मामला माना जा रहा है. इस महा-घोटाले के सामने आने के बाद से ही देश के तमाम छात्र संगठन और विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गए हैं. देश भर में उनके खिलाफ हो रहे तीखे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी जनता के गुस्से को शांत करने के लिए शिक्षा मंत्रालय में बड़ा चेहरा बदल सकते हैं. हालांकि, कुछ वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान को सीधे हटाया गया तो इससे यह संदेश जा सकता है कि सरकार दबाव में झुक गई है, इसलिए उनके विभाग को बदलकर उन्हें कोई दूसरा सांगठनिक काम सौंपा जा सकता है.
शक्तिकांत दास रच सकते हैं मनमोहन सिंह जैसा इतिहास
अगर 69 साल के पूर्व आईएएस अधिकारी शक्तिकांत दास देश के वित्त मंत्री बनते हैं, तो वह भारत के इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और देश के पहले आरबीआई गवर्नर सीडी देशमुख की खास श्रेणी में शामिल हो जाएंगे. सीडी देशमुख 1950 से 1956 तक देश के वित्त मंत्री रहे थे, जबकि मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक गवर्नर रहने के बाद 1991 में वित्त मंत्री बने थे. शक्तिकांत दास को देश की आर्थिक नीतियों, टैक्स प्रणाली और निवेश के मामलों का बहुत ही गहरा और लंबा व्यावहारिक अनुभव है. वे वित्त मंत्रालय में काम करने के दौरान 8 बार देश का बजट तैयार करने की प्रक्रिया का सीधा हिस्सा रह चुके हैं. साल 2018 से 2024 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में उनके शानदार काम को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ए+ रेटिंग के बड़े पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है.
UP से राज्यसभा भेजे जा सकते हैं दास
शक्तिकांत दास वर्तमान में संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, मंत्री बनने के बाद उन्हें 6 महीने के भीतर संसद की सदस्यता लेनी होगी. सूत्रों का कहना है कि सरकार उन्हें उत्तर प्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेज सकती है. दरअसल, नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली होने जा रही हैं, जिनमें से एक सीट पर शक्तिकांत दास को आसानी से संसद भेजा जा सकता है.
UP और पंजाब के आगामी चुनावों पर टिकी NDA की नजरें
मोदी सरकार इस मंत्रिमंडल विस्तार में आने वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को भी पूरी तरह ध्यान में रख रही है. पंजाब में साल 2027 में होने वाले चुनावों के मद्देनजर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह किसी बड़े और स्थापित सिख चेहरे को शामिल किया जा सकता है. कयास हैं कि आम आदमी पार्टी छोड़कर आए राघव चड्ढा या बीजेपी के कद्दावर नेता तरुण चुग को दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. वहीं, वर्तमान केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को मंत्रिमंडल से मुक्त करके पंजाब में जमीन पर पार्टी को मजबूत करने का अहम जिम्मा सौंपा जा सकता है.
नीतीश कुमार और श्रीकांत शिंदे की हो सकती है एंट्री
इस नए मंत्रिमंडल में सहयोगियों को साधने की भी पूरी तैयारी है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुद केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिया जा सकता है. इसके साथ ही महाराष्ट्र से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे का नाम मंत्रियों की सूची में सबसे ऊपर चल रहा है. श्रीकांत शिंदे ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को तोड़कर एनडीए के पाले में लेकर आए थे, जिसका इनाम उन्हें केंद्र में मंत्री पद के रूप में मिल सकता है. इनके अलावा टीएमसी का साथ छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने वाले सुखेंदु शेखर राय को भी नए कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है.
नौकरशाह मंत्रियों के पर कतरने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार के फेरबदल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पसंद और फीडबैक का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. हाल ही में बीजेपी और संघ के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच एक बेहद गोपनीय और लंबी बैठक हुई थी. इस बैठक के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि नौकरशाही की पृष्ठभूमि से आकर सीधे कैबिनेट मंत्री बनने वाले दो बड़े चेहरों, यानी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी की भूमिकाओं को पहले के मुकाबले थोड़ा कम किया जा सकता है, ताकि जमीन से जुड़े मूल राजनीतिक कार्यकर्ताओं को ज्यादा मौका मिल सके.


